Kuch Alfaaz

मैं ने सारी उम्र किसी मंदिर में क़दम नहीं रक्खा लेकिन जब से तेरी दुआ में मेरा नाम शरीक हुआ है तेरे होंटों की जुम्बिश पर मेरे अंदर की दासी के उजले तन में घंटियाँ बजती रहती हैं!

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