"चाय का स्वाद" दिसंबर की इस कपकपाती सर्दी में मेरे हाथ में चाय की एक प्याली है और मुझे हर घूँट के साथ वो पिछले दिसंबर का चाय का स्वाद याद आ रहा है वो अपने फूल से हाथों से चाय बनाती थी और चाय के साथ वो बिस्कुट याद है मुझे और वो दो कप जिन पर मेरा और उस का नाम लिखा था याद है मुझे चाय आज भी अच्छी है पर आज चाय का स्वाद बदल गया हैं बिस्कुट भी बदल गए हैं चाय बनाने वाले हाथ भी बदल गए हैं चाय के लिए जो मेरे पहले जज़्बात थे वो जज़्बात भी बदल गए हैं पर, वो नाम वाले कप आज भी मैं ने अपनी अलमारी में किसी ज़ेवर के जैसे सँभाल कर रखे हैं एक इसी आस में कि क्या पता वो शख़्स किसी शाम लौट आए अपने हाथों से फिर से वो चाय बनाए वही बिस्कुट हो और वही कप हो वही मौसम हो वही वो हो वही हम हो और पहले की तरह हम दोनों चाय पीते-पीते एक दूसरे की बातों में खो जाएँ और काश ये बातें सच हो जाएँ
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