Kuch Alfaaz

तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें तुम्हारे लिए चाहूँ क्यूँँ भला क्या कभी तुम ने मुझे मेरे लिए चाहा नहीं ना दर-अस्ल ये चाहने और न चाहने की ख़्वाहिश ही बे-मा'नी है बा-मा'नी है तो बस चाहत मेरी चाहत तुम्हारी चाहत या फिर किसी और की चाहत

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