Kuch Alfaaz

चलो भय्या तुम को बनाऊँ मैं घोड़ा बनोगे जो घोड़ा तो मारूँगी कोड़ा न आएगी लेकिन ज़रा चोट तुम को सिला दूँगी प्यारा सा इक कोट तुम को चलोगे शपा-शप तो दूँगी मैं चारा रुकोगे तो खाओगे चाँटा करारा ये चाँटा न होगा मगर मार कोई समझ लो कि जैसे करे प्यार कोई तुम्हारे लिए मैं ने गाड़ी बनाई हर इक शय क़रीने से इस में लगाई पड़ा है जो कपड़ों का संदूक़ इस में डराने को रख ली है बंदूक़ इस में और इक नन्ही छतरी भी रख ली है मैं ने कड़ी धूप के ख़ौफ़ से मेंह के डर से कि शायद झुके अब्र बूँदें गिराने तो बच जाऊँ बारिश से छतरी लगा के तुम्हें क्या ज़रूरत कि हो तुम तो घोड़ा चलो अब जुतो वर्ना मारूँगी कोड़ा जो मानोगे कहना तो ले दूँगी लट्टू नहीं तो हो तुम आज से मेरे टट्टू

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