Kuch Alfaaz

चलो हवा के साथ चलें और देखें रुख़ उन लोगों का जो हम से रूठ के बैठे हैं आओ उन की बात सुनें और सुन लें शायद अपनी बात रख कर उन के हाथ पे हाथ कभी तो दिल की बात सुनें और रहें हम उन के पास शायद वो भी हों उदास चलो हवा के साथ चलें

Ghalib Ahmad
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