Kuch Alfaaz

"हम दोनों" चलो हम दोनों एक दूसरे पर यक़ीन करते हैं चलो ऐसे आपस में दोनों रफ़ाक़त करते हैं माना इश्क़ है आफ़ताब का गोला चलो इस को हम दोनों माहताब करते हैं ज़ख़्म माना दिए हैं गहरे ज़माने ने हम दोनों अब साथ रह कर इनसे लड़ते हैं ये लोग ऐसे दरख़्तों से हैं जो न फल देते और न ही छाँव करते हैं रश्क करते हैं तो करने दो इनको हम दोनों शजर और शाख बनते हैं ज़माना हम दोनों को मैं और तुम करता है चलो इस के ज़ेहन का भी इलाज करते हैं यहाँ जीने में हैं ग़म बहुत तो चलो फिर हम दोनों एक दूसरे में रहते हैं चाहे ये ज़माना हमारे शे'र न पढ़े चलो हम दोनों तो मीर-ओ-ग़ालिब पढ़ते हैं

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