Kuch Alfaaz

"पैरों तले आसमाँ" चमकती हुई अकेली सी पाज़ेब इरादों के पक्के हम सेफ़र से पंजे आपस में चिपकते मुलायम से पाँव पैरों पर खड़े होने को हैं मेहरबाँ मासूम सी दुबकी हुई उँगलियाँ मीलों साथ चलने को हैं हमनवाँ वक़्त-ए-अव्वल में सर्द सी रौशनी उम्मीद ए ज़िन्दगी उड़ने को रवाँ दरख़्त से छनती हुई रौशनी आग़ाज़-ए-सुब्ह दिन भर दफ़तराँ ताकती सी खिड़की, छत ये बे-ज़बाँ नज़ारों को सहेजे थाम ले बिजलियाँ ये ख़ुशनुमा पत्ते नाज़ुक सी डालियाँ रब की नेमत क़ुदरती ख़ुशहालियाँ पैरों तले ये आसमाँ फ़र्श-ए-रह सारा जहाँ में हवा और नूर में ये बेमिसाल समाँ अलय-अस-सुब्ह ये स्वीटी का जहाँ

Nasir Husain
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