Kuch Alfaaz

शक्ल है मेरी जैसे कटोरा या कोई चाँदी का गोला रंग है मेरा गोरा गोरा अँधेरी शब का मैं हूँ उजाला मेरा उजाला हर जा फैला बाग़ हो बस्ती या हो सहरा चाहती है मुझ को सब दुनिया घर घर है मेरा ही चर्चा मुझ से बहलता है जी सब का छोटा बच्चा हो या बूढ़ा हैं आकाश पे जितने तारे हैं ये सब मेरे ही प्यारे मेरी चमक के आगे देखी रौशनी है इन सब की फीकी हक़ ने इतना रुत्बा बढ़ाया मैं ने ऊँचा दर्जा पाया तुम ऐ भोले भाले लड़को देखो मुझ को और सबक़ लो फ़ाएदा तुम भी कुछ पहुँचाओ जियो तो काम सभों के आओ गीत तुम्हारे गाएगी दुनिया होगा तुम्हारा हर-जा चर्चा हक़ है 'जौहर' का ये कहना काम आना जब तक भी रहना

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