Kuch Alfaaz

चंदा-मामा तुम को मामा नहीं कहूँगा नहीं कहूँगा माँगे का उजयाला तुम में बिन माँगे सब काला तुम में बंजर धरती बंजर खेती मौसम कब हरियाला तुम में मैं अच्छी धरती का मालिक चंदा-मामा तुम को मामा नहीं कहूँगा नहीं कहूँगा बादल से घबराते हो तुम डर डर कर छुप जाते हो तुम तुम से क्या उम्मीदें रखना कब जाओ कब आते हो तुम मैं हूँ एक बहादुर बच्चा चंदा-मामा तुम को मामा नहीं कहूँगा नहीं कहूँगा चर्ख़े वाली बुढ़िया नानी चर्ख़े ले कर कहाँ गई है आज तुम्हारी शान पुरानी सब झूटी थी नहीं रही है क्यूँँ तुम झूटी शान दिखाते चंदा-मामा तुम को मामा नहीं कहूँगा नहीं कहूँगा

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