Kuch Alfaaz

"चाय" ये चाय है न ये तुम्हारी याद दिलाती है इस सेे भी इश्क़ है और तुम सेे भी हमेशा एक कप ज़्यादा ही बन जाती है लगता है की काश तुम साथ होती पास बैठते कुछ बातें होती तुम्हारी बातो का स्वाद भी मुझे इस की तरह बेहद पसंद है इस का भी उतना ही नशा है जितना तुम्हारी नज़रों का आज तुम साथ नहीं हो पर ये चाय तो है और ये चाय है न ये तुम्हारी याद दिलाती है इस सेे भी इश्क़ है और तुम सेे भी हमेशा एक कप ज़्यादा ही बन जाती है

Rudhraxx
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