Kuch Alfaaz

चुभन मुझे जमाने में धोख़ेबाज कहा जाता है किसी से वा'दा कर के मुकर जाने का इल्ज़ाम दिया जाता है दुनिया को ख़ुश नज़र आता हूँ मैं और उस को भी असल में मैं फिर कभी इस दर्द से उभर नहीं पाया उस को चाहा उस को प्यार किया ये हसीन यादें हैं बस मेरी मरना भी चाहा मगर मैं मर नहीं पाया हाँ ग़लत हूँ शायद मैं मोहब्बत की किताब के हिसाब से ये असल दुनिया है किताबों के हिसाब से नहीं चलती फ़र्क़ बस इतना सा है उस को थी मुझ सेे बेपनाह मोहब्बत और मुझे आज भी है

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