Kuch Alfaaz

"सिगरेट" जब भी कभी मैं ने तुम्हें सुलगाया तुम कभी भी अकेली नहीं सुलगी तुम्हारे साथ एक प्यारी सी लड़की भी अक्सर सुलग जाती थी उस लड़की का वो लहजा वो आँखें माथे की वो सिलवटें अक्सर मुझे बहुत कुछ कहती थी आज एक अरसे बा'द मैं ने फिर से सिगरेट सुलगाई है दुख की बात ये है कि आज सिगरेट के साथ सुलगने वाला कोई नहीं है

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