"सिगरेट" तुझे मालूम है अच्छी तरह तुझ को बताना क्या मुझे जब इश्क़ था तुझ सेे तो सिगरेट से अदावत थी मैं सिगरेट से हमेशा हाथ अपने दूर रखता था कभी सिगरेट न छूता था मुझे सिगरेट से सिगरेट पीने वालों से अदावत थी जो सिगरेट पीते थे मुझ को वो लड़के ज़हर लगते थे मैं उन लड़कों की यारी दोस्ती से दूर रहता था तुझे मालूम है अच्छी तरह तुझ को बताना क्या हमेशा मेरी सिगरेट के धुएँ में साँस घुटती थी मिरी आँखें उबलती थीं लहू आँखों में आता था मिरी जब साँस घुटती थी तो तू बेचैन होती थी मिरी हालत पे रोती थी तिरे चेहरे के ऊपर इक उदासी तारी होती थी तिरे सीने में दिल तेरा बिना पानी की मछली की तरह पल पल तड़पता था भुलाकर दर्द को अपने मिरे आराम की ख़ातिर मिरे हक़ में ख़ुदा से तू दुआएँ करने लगती थी दुआएँ रंग लाती थीं धुआँ सिगरेट का छटता था मिरी हालत सुधरती थी मुझे सब याद है अब तक मैं माज़ी को नहीं भूला मिरी हालत सुधरती थी तो तुझ को चैन आता था तुझे जब चैन आता था तो तू सज्दे में सर रख कर ख़ुदा का शुक्र करती थी ख़ुदा का शुक्र कर के तू गले से मेरे लगती थी गले लग कर मिरे तू धी में धी में मुस्कुराती थी तिरे सीने में दिल तेरा सुकूँ की साँस लेता था मुझे सब याद है अब तक मैं माज़ी को नहीं भूला मगर अब कुछ बताना है मैं जब से तुझ सेे बिछड़ा हूँ ये मेरी ज़िंदगी तब से मुसीबत में गिरिफ़्ता है परेशाँ हूँ बहुत ज़्यादा बहुत ज़्यादा परेशाँ हूँ परेशानी सिवा होती है तो दिल में ये आता है कि सिगरेट हाथ में ले लूँ मैं सिगरेट हाथ में लेने को जब ये हाथ आगे को बढ़ाता हूँ तो तू आ कर तसव्वुर में मिरा ये हाथ अपने हाथ से ख़ुद थाम लेती है पकड़ कर हाथ मेरा तैश में मुझ सेे ये कहती है अरे छोड़ो ये सब क्या है शजर सिगरेट नहीं पीते तिरी गल मान लेता हूँ मैं सिगरेट तोड़ देता हूँ तिरे दीदार से दिल को ज़रा सा चैन आता है मैं कुछ पल के लिए अपने सभी ग़म भूल जाता हूँ मगर फिर से तिरी फ़ुर्क़त ये मन पर ग़ालिब आती है मिरी हालत बिगड़ती है परेशानी सिवा होती है तो दिल में ये आता है कि सिगरेट हाथ में ले लूँ मगर फिर ध्यान आता है तुझे सिगरेट से सिगरेट पीने वाले से मिरे जैसे अदावत है तो अब सिगरट भला क्यूँ अपने इन हाथों से छू लूँ मैं तुझे नाराज़ क्यूँ कर दूँ तुझे मुझ सेे मुहब्बत अब नहीं बाक़ी तो क्या शिकवा करूँँ तुझ सेे मुझे तुझ सेे मुहब्बत है मैं सिगरेट तोड़ देता हूँ ले सिगरेट फेंक देता हूँ मुहब्बत को निभाता हूँ मैं हर लम्हा तिरी यादों में गुम-सुम बैठा रहता हूँ तुझे मालूम है अच्छी तरह तुझ को बताना क्या
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