Kuch Alfaaz

उट्ठो क़दम क़दम से मिलाते चले चलो सब मिल के एक राह बनाते चले चलो मंज़िल की धुन में झूमते गाते चले चलो हर मरहले को सहल बनाते चले चलो बन कर घटा फ़ज़ाओं पे छाते चले चलो हर हर क़दम पे धूम मचाते चले चलो तफ़रीक़-ए-रंग-ओ-नस्ल मिटाते चले चलो इंसानियत की शान दिखाते चले चलो आगे बढ़ो रुको न किसी रहगुज़ार पर हर दम सफ़र का लुत्फ़ उठाते चले चलो मायूसियों में छेड़ दो नग़्में उमीद के तारीकियों में जोत जगाते चले चलो टूटे हुए दिलों को मोहब्बत से जोड़ दो जौहर अमल के अपने दिखाते चले चलो धरती भी जगमगा उठे आकास की तरह रातों में वो चराग़ जलाते चले चलो चमको गगन के तारों की सूरत ज़मीन पर तुम आसमाँ ज़मीं को बनाते चले चलो पतझड़ की रुत में फूल खिलाना कमाल है पतझड़ की रुत में फूल खिलाते चले चलो बदले ख़िज़ाँ 'नज़ीर' चमन में बहार से वो गीत ज़िंदगी के सुनाते चले चलो

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