Kuch Alfaaz

तुम मुझे ख़ामोश देख क्यूँ घबराती हो मेरे हलक़ में गिरते क़तरे एक दिन मोती बनेंगे उन्हें तेरे क़दमों में परोसने चला आऊँगा तुम लम्हा भर को मुस्कुरा देना साँसें बोझल कर पलकें झुका देना तू तो जानती है मुझे फ़रेब से मोहब्बत है

Eruj Mubarak
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