Kuch Alfaaz

अभी फिर से फूटेगी यादों की कोंपल अभी रग से जाँ है निकलने का मौसम अभी ख़ुशबू तेरी मिरे मन में हमदम सुब्ह शाम ताज़ा तवाना रहेगी अभी सर्द झोंकों की लहरें चली हैं कि ये है कई ग़म पनपने का मौसम सिसकने सुलगने तड़पने का मौसम दिसम्बर दिसम्बर दिसम्बर दिसम्बर

WhatsAppXTelegram
Create Image