नज़्म:- एक दिन देखना! देखना एक दिन ये हैरान करती दुनिया मुझे हैरानी से देखेगी, जो लिखकर छोड़ आया हूँ मैं उस की ज़िंदगी में आधा मिसरा न जाने कौन है जो अब उसे पूरा करेगा? मोहब्बत ज़िंदगी की ही रविश थी और कब सोचा गया था मोहब्बत अपनी जानिब इस परेशानी से देखेगी, देखना तुम एक दिन ये हैरान करती दुनिया मुझे हैरानी से देखेगी
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