"बस ये शक्ल वाले" देखते रह जाते हैं अब अक़्ल वाले लूटते हैं बज़्म बस ये शक्ल वाले बाक़ी आते हैं चुराने नक़्ल वाले टूटते हैं मेहनती से नस्ल वाले इस ज़माने में जो हैं बद-शक्ल वाले हाँ वही होते हैं अब तो क़त्ल वाले शक्ल वाले क्यूँ हैं यारा अस्ल वाले शक्ल से मिलते हैं क्यूँ सब वस्ल वाले बनिये मालिक और ठग हैं फ़स्ल वाले हम तभी हैं इन दिनों बे-वस्ल वाले अक़्ल छोटे तो बड़े हैं शक्ल वाले
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