Kuch Alfaaz

मुल्ज़िम पकड़ने में जो मज़ा है इस से ज़्यादा शायद मुजरिम होने में है ग़ार के अंदर क्या है ग़ार के बाहरस सोचना अच्छा नहीं लगता पुराने पत्थर पर कंदा उसूल जानने को भूखों का हिस्सा ख़र्च करना क्या ज़रूरी है रीढ़ से लगा पेट अश्लोक से नहीं भरता इतना जानने को ग़ार में जाना क्या ज़रूरी है तुम ज़रा सोचो मैं ग़ार हो कर आता हूँ

Eruj Mubarak
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