Kuch Alfaaz

"ढूँढ़ रहा हूँ" इस कश्मकश भरी ज़िन्दगी में मैं सुकून को खोज रहा हूँ कुछ तो खोया है मैं ने जिस को फिर से मैं ढूँढ़ रहा हूँ मैं ढूँढ़ रहा हूँ वो लट्टू जो रस्सी से घूमा करता था मैं ढूँढ़ रहा वो यार जिन के संग झूमा करता था मैं ढूँढ़ रहा हूँ वो घाव जो मांझे से कट कर आते थे मैं ढूँढ़ रहा हूँ वो पाव जो सड़क पे नंगे भागे थे मैं ढूँढ़ रहा हूँ वो नींद जो नींद नहीं मदहोशी थी मैं ढूँढ़ रहा हूँ वो बातें जो जानती ना ख़ामोशी थी मैं ढूँढ़ रहा हूँ वो बचपन जो बचपन वक़्त ने छीना है कोई वक़्त में पीछे ले चलो मुझे बचपन वापस जीना है कोई वक़्त में पीछे ले चलो मुझे

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