Kuch Alfaaz

फिंदक फिंदक फिंदक फ़क धुनक धुनक धुन धुनक धुनक ताँत बजी और निकला राग रुई बनी साबुन का झाग कैसी छनती जाती है बादल बनती जाती है कितना ढेर हुआ आहा मैं इस ढेर पे कूदुँगा कोई चोट न आएगी रूई मगर दब जाएगी इत्ती रूई इतना ढेर हो गई बारह तेरह सेर ले अब रूई हो गई साफ़ भर ले तकिए और लिहाफ़ इन से सब सुख पाते हैं ओढ़ते और बिछाते हैं मिलता है सब को आराम वाह रे धुनिए तेरा काम वाह री धुनकी धुनक धुनक फिंदक फिंदक फ़क फ़क फ़क

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