Kuch Alfaaz

“दिल बेचारा” आज भी याद उसे करता है दिल बेचारा आह क्यूँ उस के लिए भरता है दिल बेचारा सारी तकलीफ़ ये तन्हा ही उठा लेता है पर न ये शिकवा गिला करता है दिल बेचारा ये न सोचो कि इसे मर्ज़ नहीं होता है बात यूँॅं है कि ये ख़ुद-ग़र्ज़ नहीं होता है बाँटने में ख़ुशी क्या क्या नहीं झेला इसने पर शिकायत न कभी करता है दिल बेचारा आज भी याद उसे करता है दिल बेचारा तुम न समझे हो न समझोगे कभी भी इस को क्यूँ न होता है कभी दर्द कोई भी इस को बात अपनों की हो या हो किसी बेगाने की फ़र्क दोनों में नहीं करता है दिल बेचारा आज भी याद उसे करता है दिल बेचारा क्या निभा सकता है इस जैसा भी वा'दा कोई होगा ज़िद्दी भी नहीं इस सेे ज़ियादा कोई जो अगर ठान ले करना है किसी को अपना फिर जहाँ से भी नहीं डरता है दिल बेचारा आज भी याद उसे करता है दिल बेचारा

SHIV SAFAR
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