Kuch Alfaaz

दिल बहुत दुखता है हर बात पे दिल दुखता है सुब्ह-ए-नौ-ख़ेज़ पे सूरज की जहाँबानी पे शाम-ए-दिल-दोज़ पे अंजाम-ए-गुल-अंदामी पे अक्स-ए-मौजूद पे अनवार-ए-रुख़-ए-ज़ेबा पे नक़्श-ए-मौहूम पे अखफ़-ए-दिल-ए-फ़र्दा पे बस्त-ए-अफ़्लाक पे अफ़साना-ए-रानाई पे शरह۔ए-नैरंगी-ए-हस्ती-ओ-ज़ुलेख़ाई पे रात के सोज़ पे शामों के महक जाने पे हिद्दत-ए-शौक़ में कलियों के चटख़ जाने पे मुज़्महिल तारों पे सह में हुए ऐवानों पे क़हवा-ख़ानों में जम्अ' शहर के दीवानों पे रिंद-ए-मख़मूर-ओ-बला-नोश पे परवानों में शम-ए-कुश्ता पे उजड़े हुए इंसानों पे आरज़ूओं की सुबुक-सारी पे अर्ज़ानी पे दिल शफ़क़ रंग पे जज़्बों की फ़रावानी पे हुस्न-ए-ख़ुद-आरा-ओ-ख़ुद-बीं की दिल-आराई पे इश्क़-ए-मख़मूर की जाँ-सोज़ी-ओ-तन्हाई पे पहलू-ए-दिल से कहीं लग के कोई रोता है दस्त-ए-क़ातिल पे कहीं अश्क कहीं धब्बे हैं दिल मसलता है कोई हाथ में ले कर हर दम दिल बहुत दुखता है हर बात पे दिल दुखता है

Ekram Khawar
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