"ज़िंदगी की गणित" दिल में आगे कोई एडिशन नहीं हो सकता टूट चुका हूँ कोई डिवीजन नहीं हो सकता पाईथागोरस थ्योरम तुम पर हावी है लव में कोई ट्राएंगल नहीं हो सकता अब आगे कोई फ़्रेक्शन नहीं हो सकता आगे कोई सब्सट्रैक्शन नहीं हो सकता ट्रेपीजीयम सा चेहरा बना डाला तुम ने मुझ को कहती हो फिर क्यूँ स्क्वायर बनो डेसी सेंटी हेक्टो सब ने बोला था ये दिल का एंगल सम प्रॉपर्टी करवाओ फिर प्रूफ़ करो कि दोनों साइड से इक्वल है जीवन में तो तुम ने ही बोडमास दिए थे उन ज़ख़्मों का अब सॉल्यूशन नहीं हो सकता 'रंजन' जीवन में और मैथ में क्या अंतर दोनों गर फँस जाए तो ग़ुस्सा आता है
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