Kuch Alfaaz

*दिल में दीपक जला रहा हूँ मैं* जो इतना शरमा रहा हूँ मैं दिल को फिर से लगा रहा हूँ मैं अबकी रिश्ता नहीं आंधी से दिल में दीपक जला रहा हूँ मैं कोई गीत सुना रहा हूँ मैं उस को याद दिला रहा हूँ मैं उस की पायल मेरे पास है उस सेे धुन बजा रहा हूँ मैं जैसे उस ने मुझे भुलाया है वैसे उस को भुला रहा हूँ मैं उस की याद न आए फिर से दिल को फिर से लगा रहा हूँ मैं जैसे सावन बुला रहा हूँ मैं कोई मोर नचा रहा हूँ मैं अँधेरा छा गया दिल पे सो दिल में दीपक जला रहा हूँ मैं

Surya Tiwari
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