Kuch Alfaaz

"दिल नहीं तोड़ोगी" तुम तो घर बसा लोगी साथ किसी के पर देखो मैं तन्हा रह जाऊँगा देखो रुक जाओ न जाओ मान भी जाओ कह देता हूँ मैं कुछ कर जाऊँगा जाने को तो चली जाओगी पर कह देता हूँ साथ तुम्हारे मेरी सारी ख़ुशियाँ जाएँगी ये रुत ये बहारें फिर मुझ को ना भाएँगी बरसातें भी गुज़रेंगी बस तन पर मेरी ये रूह भिगा ना पाएँगी आख़िर एक ख़ुशबाश रूह का तुम क़त्ल कर जाओगी मेरे बिन तुम भी जान भला फिर कैसे रह पाओगी याद करो कहा था तुम ने साथ नहीं छोड़ोगी चाहे कुछ भी हो जाए पर दिल नहीं तोड़ोगी फिर क्यूँँ ऐसी बातें करती हो मान भी जाओ कह दो ना जान मेरी मुँह नहीं मोड़ोगी तुम मेरा दिल नहीं तोड़ोगी

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