"अँधेरे" दिन का आसमान दिनभर इंसानों के कलेजे से अँधेरे अपनी परात में डालता हुआ रात के आसमान के लिए जमा करता है अगली सुब्ह वो अँधेरे और पुराने-नये कलेजे पा जाते हैं मैं ख़याल करता हूँ उन अँधेरों का जिन्हें एक ज़माने तक चम्मच से खुरचे जाने की आरज़ू रहती है
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