Kuch Alfaaz

"अँधेरे" दिन का आसमान दिनभर इंसानों के कलेजे से अँधेरे अपनी परात में डालता हुआ रात के आसमान के लिए जमा करता है अगली सुब्ह वो अँधेरे और पुराने-नये कलेजे पा जाते हैं मैं ख़याल करता हूँ उन अँधेरों का जिन्हें एक ज़माने तक चम्मच से खुरचे जाने की आरज़ू रहती है

Tarun Bhati
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