Kuch Alfaaz

"दो चाँद" बिखरती चाँद की चाँदनी में उस की ज़ुल्फ़ें नागिन-सी लहराया करती है कभी इधर कभी उधर मैं जब उन ज़ुल्फ़ों में एक पानी की बूँद के जैसे तेल पर तैरती है वैसे ही डूबा और मैं तैरता रहा उस की ज़ुल्फ़ों के तले उस दिन मैं ने देखा एक ज़ुल्फ़ों की तरफ़ चाँद और एक ज़ुल्फ़ों के पार चाँद

Manas Ank
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