Kuch Alfaaz

"दूसरा ब्याह कर ले गया" लाल जोड़ा तुम्हारे धवल रूप पर देखता सामने बैठ कर मैं रहा तुम नए साजना संग विवाहित हुईं रो हमारा विरह देख कर मैं रहा जो घड़ा प्यार का मैं बनाता रहा वो घड़ा दूसरा कौन भर ले गया प्यार हम ने किया था सफल ना हुआ अब उसे दूसरा ब्याह कर ले गया सात फेरे तुम्हारे व प्रियतम के संग सात जन्मों विरह की निशानी बने प्यार के थे अधूरे दो किरदार हम प्यार की जो अमर इक कहानी बने भाग्य में जो नहीं थीं मिली ना हमें भागवाला मृदुल वो अधर ले गया प्यार हम ने किया था सफल ना हुआ अब उसे दूसरा ब्याह कर ले गया

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