Kuch Alfaaz

ये जीवन इक राह नहीं इक दोराहा है पहला रस्ता बहुत सहल है इस में कोई मोड़ नहीं है ये रस्ता इस दुनिया से बेजोड़ नहीं है इस रस्ते पर मिलते हैं रेतों के आँगन इस रस्ते पर मिलते हैं रिश्तों के बंधन इस रस्ते पर चलने वाले कहने को सब सुख पाते हैं लेकिन टुकड़े टुकड़े हो कर सब रिश्तों में बट जाते हैं अपने पल्ले कुछ नहीं बचता बचती है बे-नाम सी उलझन बचता है साँसों का ईंधन जिस में उन की अपनी हर पहचान और उन के सारे सपने जल बुझते हैं इस रस्ते पर चलने वाले ख़ुद को खो कर जग पाते हैं ऊपर ऊपर तो जीते हैं अंदर अंदर मर जाते हैं दूसरा रस्ता बहुत कठिन है इस रस्ते में कोई किसी के साथ नहीं है कोई सहारा देने वाला नहीं है इस रस्ते में धूप है कोई छाँव नहीं है जहाँ तसल्ली भीक में दे दे कोई किसी को इस रस्ते में ऐसा कोई गाँव नहीं है ये उन लोगों का रस्ता है जो ख़ुद अपने तक जाते हैं अपने आप को जो पाते हैं तुम इस रस्ते पर ही चलना मुझे पता है ये रस्ता आसान नहीं है लेकिन मुझ को ये ग़म भी है तुम को अब तक क्यूँँ अपनी पहचान नहीं है

Javed Akhtar
WhatsAppXTelegram
Create Image