Kuch Alfaaz

" दोस्त " दोस्त तुम मुझ को भूल गए हो ना दोस्त कहीं ऐसा न हो मैं मर जाऊँ और तब तुम को ख़याल आए कि एक तुम्हारा दोस्त था वही जिस का बस एक तुम्हीं दोस्त थे दोस्त हो दोस्त तुम्हारे साथ मैं ख़ुश रहता था दोस्त अब मैं ख़ुश नहीं हूँ मेरे साथ बहुत कुछ बुरा हुआ इन दिनों मेरा सब कुछ मुझ सेे जुदा हुआ इन दिनों सब कुछ में सब कुछ एक तुम ही तो थे दोस्त दोस्त मैं जानता हूँ तुम्हें एक न एक दिन एहसास होगा मगर कहीं ऐसा न हो तब तक बहुत देर हो जाए दोस्त कहीं ऐसा न हो तुम को मैं बेजान लेटा हुआ दिखूँ ख़ैर फिर भी रोना नहीं मेरे मरने पर ये भी मत सोचना कि तुम ने मुझे फिर से खो दिया है दोस्त तुम महसूस करना कि मैं अब भी तुम्हारे साथ सिगरेट पी रहा हूँ दोस्त तुम महसूस करना तुम्हारे साथ बाइक पर बैठा हुआ हूँ दोस्त तुम महसूस ये भी करना मैं तुम्हें गालियां दे रहा हूँ

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