'दोस्ती' जनवरी की सर्द भरी रात में जब रज़ाई ओढ़ने के बावजूद भी इंसान की ठंड नहीं जाती उस वक़्त किसी गरीब को अगर एक पतली सी चादर भी मिल जाए तो... उसे जो थोड़ी सी राहत मिलती है तुम्हारी दोस्ती उस सर्द भरी रात की वो पतली सी चादर है
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