Kuch Alfaaz

"दोस्ती" दोस्ती दिल का सुकूँ ज़ीस्त की आसानी है दोस्त है पास तो फिर दूर परेशानी है दोस्ती साथ में बस वक़्त बिताना ही नहीं घूमना फिरना फ़क़त हँसना हसाना ही नहीं शामिल-ए-हाल है ख़ालिक़ की इनायत बन कर दोस्ती साथ में रहती है हिदायत बन कर दोस्त है साथ में तो साथ है ख़ुशहाली भी दोस्ती करती है अख़लाक़ की रखवाली भी दफ़अ'तन लब पे फ़क़त दोस्त का नाम आता है दोस्त मुश्किल में हो तो दोस्त ही काम आता है दोस्ती रास्ते हमवार बना देती है दोस्ती पैर के छालों की दवा देती है दोस्त हो साथ में तो दिल में तवानाई है दोस्त आ जाए जो महफ़िल में तो रा'नाई है दिल-ए-मायूस की तन्हाई मिटा देती है दोस्ती उम्र की रफ़्तार घटा देती है दोस्त बचपन में अगर कोई बिछड़ जाता है ज़िंदगानी के हर एक मोड़ पर याद आता है ये भी सच है कि ज़माने की ख़ुशी एक तरफ़ दोस्त के लौट के आने की ख़ुशी एक तरफ़ दोस्त एक बार जो सीने से लिपट जाता है डूबती नब्ज़ का सूरज भी पलट आता है जब ग़लत दोस्त की सोहबत से बिगड़ जाती है कितने जंजाल में ये ज़िंदगी पड़ जाती है हर ग़लत बात पे यूँँ दोस्त की हामी न भरो हाँ करो दोस्ती लेकिन ये ग़ुलामी न करो है वुज़ू जैसे अहम रब की इबादत के लिए दोस्ती फ़र्ज़ है वैसे ही मोहब्बत के लिए तेरा बातिन भी अगर है तेरे ज़ाहिर जैसा दोस्त मिल जाएगा एक इब्न-ए-मज़ाहिर जैसा

Salim Husain
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