Kuch Alfaaz

दूधिया रंग के क़ुमक़ु में दूधिया रौशनी जामुनी रंग शीशों पे ये रौशनी का धुआँ ज़ेहन की धीमी धीमी सुलगती हुई आग का इम्तिहाँ कुछ ग्रे रंग के सूट कुछ चम्पई सारियाँ दस्त-ए-नाज़ुक में दस्त-ए-सबा अध-खिली ख़्वाब-आलूद आँखों में अफ़्साने ना-ख़्वास्ता गुफ़्तुगू हम-नशीनी से अँगड़ाई के साथ पहलू तही जज़्ब करती पसीने को बर्क़ी हवा सरसराते हुए आँचलों से शफ़क़ रंग जिस्मों की उठती महक और लता एक मानूस आवाज़ की धार क्लासिकी लहरों से उठ कर दिलों में उतरती हुई नग़्मगी शहद आहंग है नग़्मगी निकहत-ओ-रंग है मेज़ पर शो'ला-ए-तूर है सारतर सेल्फ़ में बंद है काग उड़ाती हुई बोतलों का सुरूर आगही के लिए ज़हर है

Qamar Hashmi
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