Kuch Alfaaz

"दुख" मुझे जो लगा, वो नहीं हूँ मैं अब उस जगह तो नहीं हूँ तू इक कॉल मैसेज नहीं कर रही है कि ऐसी वो क्या ही शिकायत है? जो मुझ सेे तू कर नहीं पा रही है बताती नहीं है सताती रही है मुझे तू बता क्यूँ ख़फ़ा है मुझे तू बता क्या हुआ है तू कुछ बोल ये ख़ामोशी काटती है मुझे जान ले बस ये आँखें किसे रोती है बस? मुझे किस का दुख है? मुझे पूछ तू फिर बताऊँ तेरा नाम मैं और तुझे मैं सुनाऊँ दिखाऊँ मेरा ग़म मेरे ज़ख़्म जो भर नहीं पा रहे हैं मुझे तेरे ऐसे सताने का दुख है तेरे लौट के फिर न आने का दुख है मेरे पास आ मेरा दुख जान लड़की सखी कोई इतना ख़फ़ा भी नहीं होता है जैसे कि तू है कि ग़ुस्सा ज़ियादा दिनो तक नहीं करना होता है समझी ए लड़की कि ग़लती भुलाने के ख़ातिर बनी है मोहब्बत निभाने के ख़ातिर बनी है कि जब दोस्ती कर ली जाए उसे फिर निभाना भी होता है लड़की मुझे याद है तू मगर मैं भुलाया गया हूँ तू बेशक मुझे छोड़ दे पर ज़रा सुन कहीं भी कभी भी किसी भी हाँ दरिया ने प्यासे को प्यासा नहीं मारा है फिर तो अब तू चली आ घड़ी हाथ की बंद हो जाए इस सेे के पहले चली आ मेरे हाथ को थाम ले दोस्त ये ज़िंदगी बाय बोले मुझे इस सेे पहले तू आ और मुझे तू गले से लगा ले

BR SUDHAKAR
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