"दुल्हन" मैं तुम को ये बताना चाहता हूँ तुम्हें दुल्हन बनाना चाहता हूँ मेरी बातों पे थोड़ा ध्यान दीजो मैं तुम को क्या बताना चाहता हूँ तुम्हीं से दिलकशी है उंस भी है मुहब्बत को बढ़ाना चाहता हूँ अक़ीदत को इबादत ही समझकर जुनूँ के पार जाना चाहता हूँ तुम्हें दुल्हन बनाना चाहता हूँ सभी बातों को मेरी सच न मानो मैं थोड़ा सच छुपाना चाहता हूँ यहाँ मैं रह नहीं सकता अकेले तभी मैं भी ठिकाना चाहता हूँ लगेगी किस तरह जोड़ी हमारी मैं तुम सेे राय लेना चाहता हूँ तुम्हें दुल्हन बनाना चाहता हूँ तेरे क़दमों में ही ख़ुशियाँ बिछाकर मैं दुनिया को दिखाना चाहता हूँ जो मर्ज़ी हो तुम्हारी तो सही है तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ तुम्हारे दिल तुम्हारे शहर में ही ओ जानेमन ठिकाना चाहता हूँ तुम्हें दुल्हन बनाना चाहता हूँ मैं तुम को ये बताना चाहता हूँ
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