दुल्हन का दुख कैसी उलझन बैठी है सामने दुल्हन बैठी है इक लड़का जो मेहमाँ है उस की धड़कन बैठी है कैसे इश्क़ सितारों को मार गया बेचारों को दुल्हन के रोते-रोते सात वचन होते-होते लड़का सत्तर बार मरा और सहर के साढ़े दस सर्द पड़ी सारी नस-नस दुल्हन पी के संग गई असली पी को छोड़ गई लड़के का दिल आधा था सच कहता हूँ पर यारों दुल्हन का दुख ज़्यादा था मैं उस का दुख लिख न सका कोशिश की पर लिख न सका
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