Kuch Alfaaz

"मृगमरीचिका" दुनिया जैसे एक पहेली पहेली मानो जैसे उस की आँखें आँखें जैसे गहरा समुंदर कोई गहरा समुंदर जैसे उस की बातें बातें जैसे मीठी चाशनी जैसी चाशनी मानो जैसे उस के होंठ होंठो पे जैसे प्यारी लकीरें कई लकीरें जैसे कोई उलझन नई उलझन जैसे उस की साँसें साँसें जैसे उठता तूफ़ान कोई तूफ़ान वो जो मेरे मन में है मन मानो जैसे एक छल कोई छल जैसे पहले प्यार का ख़त प्यार जो कि उस सेे मैं करती हूँ मैं जैसे उस की अधूरी नज़्म कोई

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