Kuch Alfaaz

वही इक अजनबी चेहरा मिरे ख़्वाबों में आता है उदासी देखती हूँ जब भी उस की गहरी आँखों में चुरा लेता है ये मंज़र मिरी हर नींद का लम्हा उदासी उस के चेहरे की मुझे सोने नहीं देती मुझे एहसास होता है कि उस की गर्म साँसें भी मुझे सोने नहीं देतीं मुझे जीने नहीं देतीं मुझे एहसास होता है वही एक अजनबी चेहरा मेरे नज़दीक आ कर लोरियों से अपनी धड़कन की सुलाता है मुझे और दफ़्अ'तन फिर लूट जाता है

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