Kuch Alfaaz

"एक दिन" एक दिन तुम उठोगी बिस्तर से तुम्हें मेरा ख़्याल आएगा और याद आएगी मेरी मोहब्बत, मेरी बातें कैसे एक शख़्स ने तुम्हें चाहा था बेइंतहा और फिर तुम मेरी तस्वीर देखोगी तुम्हारी आँखों में आँसू होंगे तुम चाहकर भी मुझे भुला नहीं पाओगी अभी तो तुम मुक़र जाओगी मगर उस वक़्त किधर जाओगी? घर की दर-ओ-दीवार देखोगी मेरी तस्वीरें बनती नज़र आएगी दहलीज़ से मेरी सदाएँ आएगी तुम मेरी यादों में ख़ुद को तन्हा पाओगी और सोचोगी अपने इस अंदाज़ पर जिस तरह तुम ने मुझे रुलाया, सताया मगर तब मैं वहाँ नहीं रहूँगा फूलों की ख़ुशबुओं में बारिश की बूंदों में सुब्ह की चाय में मुझे देखोगी, मुझे ही पाओगी हर शख़्स में मेरा चेहरा दिखेगा निगाहों में मेरे ख़्वाबों का पहरा होगा ज़ेहन में बस मेरे ख़याल आएँगे मेरी पाक मोहब्बत होगी और तुम्हारा दिल उस वक़्त तुम सेे सवाल पूछेगा क्या कमी थी उस में जो इस तरह तन्हा किया वो शख़्स जो मुझ सेे मोहब्बत करता था उसे इस तरह रुस्वा किया इसी सोच में डूबी तुम ख़ुद ही रोने लग जाओगी पछताओगी और उस वक़्त, बस उस वक़्त मेरी यादों में खो जाओगी

Prit
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