Kuch Alfaaz

उजाड़ सड़कों की दोनों जानिब घने दरख़्तों के लम्बे साए तले ज़माने की धूप से तपते दिन गुज़ारे घनेरी ज़ुल्फ़ों की ठंडी छाँव तले जवानी की गर्म जलती दो-पहरें काटीं घने दरख़्तों का साया क़ाएम घनेरी ज़ुल्फ़ों की छाँव दाइम मगर मिरे सर से ढल चुकी है

Ejaz Farooqi
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