Kuch Alfaaz

दिलों में हमारे मोहब्बत जगा दे रग-ओ-पै से नफ़रत का जज़्बा मिटा दे ख़ुदाया सबक़ एकता का पढ़ा दे हमें आज फिर भाई भाई बना दे कि आसान हो जाए जीना हमारा निगाहों में चमके सुकूँ का सितारा हर इक सम्त में आज हलचल मची है कहीं बेकली है कहीं खलबली है कहीं आग दीवार-ओ-दर में लगी है किसी घर की बुनियाद में थरथरी है हुआ है सुकूँ का समाँ पारा-पारा शरारत का सुलगा हुआ है शरारा शरारत के शो'लों को कोई बुझाए जुनूनी दिमाग़ों को अंकुश लगाए अहिंसा की पोथी कोई फिर पढ़ाए तशद्दुद के हाथों से हम को बचाए जलाए न अब कोई बस्ती दोबारा न छीने कोई ज़िंदगी का सहारा हमें फिर ये एहसास कोई दिलाए कोई ठीक से ये हक़ीक़त बताए नहीं फ़र्क़ रंगों में कुछ भी दिखाए लहू एक का दूसरे से मिलाए दिखाए कि दोनों का है एक धारा बताए कि दोनों का है इक नज़ारा

Ghazanfar
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