Kuch Alfaaz

माँ एक जादूगरी तुम ने देखी है एक में मैं ने उस ख़ुदा को रखा है बड़े इत्मीनान से सोचा है फिर हर पहलू में जहाँ को रखा है हर आवारगी में घूमता हूँ पतंगों की तरह उस ज़मीं से नीचे आसमाॅं को रखा है और सुकूॅं की नींद आती है उस के ऑंचल की ओट में हर सबूतों और गवाहों को मद्देनज़र रखते हुए सब सेे पहले माँ को रखा है

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