ये दीवानी सी इक लड़की हसीं भी दिलरुबा भी है अभी मा'सूम है लेकिन वफ़ा से आश्ना भी है मिरे घर की हैं दीवारें उसी के रंग से रौशन उसी के दम से पाकीज़ा मिरी उम्मीद का आँगन जबीं उस की सहर जैसी अज़ाँ देती हुई आँखें नज़र का इम्तिहाँ लेती शब-ए-तारीक सी ज़ुल्फ़ें निगाहें ज़िंदगी जैसी अदाएँ चाँदनी जैसी वफ़ा उस की मिरी ख़ातिर असा-ए-मूसवी जैसी तक़द्दुस हूर के जैसा सरापा नूर के जैसा मुकम्मल हुस्न है उस का मिरे दस्तूर के जैसा निगाहों के लिए मेरी ये है तनवीर-ए-मुस्तक़बिल ये सुब्ह-ए-नौ की मंज़िल है ये है तस्वीर-ए-मुस्तक़बिल हर इक अंदाज़ है उस का धनक मंज़र का हम-साया 'वली' ये लाडली बेटी मिरी हस्ती का सरमाया ये दीवानी तो है लेकिन यही दानिश-निशाँ होगी इसी की गोद में पल कर नई दुनिया जवाँ होगी
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