Kuch Alfaaz

मिरे गिर्द अब लाल पीली दवाओं की इन शीशियों से न दीवार चुनने की कोशिश करो तुम हिसार-ए-दुआ में मुझे क़ैद करने की ज़िद छोड़ दो अब मिरे ज़ख़्म-ख़ुर्दा बदन की न तुम सूइयों से तबीबों की पैवंद-कारी करो अपनी पहचान की शक्ल बिगड़ी हुई लग रही हो तो मेरी इक अच्छी सी तस्वीर कमरे में तुम टाँग लो मुझ को घर के किसी अंधे कोने में अब डाल दो

Saba Ikram
WhatsAppXTelegram
Create Image