Kuch Alfaaz

सब्ज़ शाख़ों पर नए सुर्ख़ पत्ते मख़मल की सूरत सजने लगे पुरानी शाख़ों पर नए पंछी चहकने लगे पिछ्ला मौसम कब बीता नया मौसम कब आया ये सोच कर हम हँसने लगे नए आशियाने नए मौसम सब तुम्हारे हैं बीती रुतों के मंज़र-ना में बस हमारे हैं

Faiyaz Rifat
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