Kuch Alfaaz

मैं ने तुम्हें तुम्हारे कँवल झील चेहरे को फ़रामोश कर दिया है पुरानी साअ'तों की शीरीनियों को यकसर भुला दिया है लफ़्ज़ों के मरमरीं पैकर जुमलों की लतीफ़ सौग़ातें हम से हमारा सब कुछ छीन लिया गया छीनने वाले क़ज़्ज़ाक़ हमारे अपने अज़ीज़ थे हमारे अपने रफ़ीक़ थे

Faiyaz Rifat
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