Kuch Alfaaz

वो एक शब थी सफ़ेद गुलाबों वाले तालाब के बिल्कुल नज़दीक बादलों की पहली आहट पर उस ने रख दिए होंट होंटों पर मौसीक़ी की तितली गीत गाने लगी उस के साँसों के आस-पास उस की ख़ुशबुओं के घुँघरू बज रहे थे उस शब हुआ की सफ़ेद गुलाबी छतों पर वो उमड रही थी एक तेज़ समुंदरी लहर की तरह वो जिस्म पर नक़्श हो रही थी तितलियों से भरे हुए एक ख़्वाब की तरह वो एक शब सफ़ेद गुलाबों वाले तालाब के बिल्कुल नज़दीक शब-भर बादलों की हल्की और तेज़ आहटें और शब-भर होंट होंटों पर साँस साँसों पर और जिस्म जिस्म की सफ़ेद गुलाबी छतों पर

WhatsAppXTelegram
Create Image