Kuch Alfaaz

"एक रिश्ते की मौत" उस रिश्ते में अब इतनी सी ही जान रह गई है उस ने कहा है हमारे बीच अब सिर्फ़ जान पहचान रह गई है वो शख़्स सफ़र में बहुत आगे निकल गया है मंज़िल पर पहुँच कर भी नज़र परेशान रह गई है वो जो कभी हमारी जान हुआ करती थी अब वो हम सेे ही अंजान रह गई है दूसरों की ही तरह अपना भी रिश्ता टूट गया अब बस हमारी झूठी अना और उन की झूठी शान रह गई है जब जब किया किसी ने उन सेे ज़िक्र हमारा आँखों में आँसू भर आए हैं और चेहरे पर झूठी मुस्कान रह गई है तुम थीं तो शहर ए दिल की हर गली चहकती थी तुम जो गईं तो यहाँ हर गली वीरान रह गई है जो किसी को सुनाई ना जा सके कहने को मेरे पास ऐसी इक दास्तान रह गई है

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