Kuch Alfaaz

एक रोज़ तुम को बेबसी मेरी समझ आ जाएगी एक रोज़ तू भी ढूँढ़ते मुझ को कही खो जाएगी जब तुम्हें एहसास हो जाएगा मेरे दर्द का ख़ामोश तुम भी ओढ़ लोगे एक मौसम सर्द का एक रोज़ मेरी सब शिकायत ख़ुद करोगे ख़ुद से ही उस रोज़ चुप रह कर भी तुम सेे बात ख़ुद हो जाएगी एक रोज़ तुम को जब मेरा डरना समझ आ जाएगा उस रोज़ तुम को क्या था वो करना समझ आ जाएगा बस अब उस घड़ी तक ख़ुद को मैं ख़ुद के हवाले छोड़ दूँ अब चाहता हूँ मैं तुम्हें उस के हवाले छोड़ दूँ

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